सबसे बढ़िया बिस्किट ब्रांड कौनसा है ?
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बिस्किट में सबसे अच्छा बिस्किट कौनसा है इस सवाल के उत्तर में कुकिंग में महारत हासिल चतुर गृहिणी श्रीमती अनिता गुप्ता का रिव्यू पढ़िए :
"बचपन से ही पारले बिस्किट खा कर बड़े हुए हैं। सुबह-दोपहर की चाय पारले बिस्किट के बिना बेमजा है। बरसों से इसके स्वाद में कोई चेंज नहीं आया है। सफर में कहीं जाना हो तो कपड़ों के अलावा पारले बिस्किट के पैकेट्स रखना जरूरी है। कोरोना काल में लॉक डाउन के वक्त तो पारले बिस्किट घर में जरूरी भोजन बन गया है। यह देश की किसी गली-मोहल्ले की छोटी दुकान पर भी मिल जाएगा।"
वास्तव में भारत में पारले बिस्किट की लोकप्रियता विवादों से परे है। यह पोस्ट समाप्त करने से पहले हमारे प्रिय बिस्किट पारले के इतिहास के बारे में भी जानकारी ले लें :
"पारले" नाम दरअसल मुम्बई के उप नगरीय रेलवे स्टेशन विले-पार्ले से लिया गया है। जहां "पारले एग्रो प्रोडक्ट्स" फैक्ट्री स्थित है। पारले कम्पनी एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है जिसकी स्थापना सन् 1938 में हुई। सन् 1980 तक यह "पारले ग्लूको" बिस्किट के नाम से जानी जाती थी। बाद में इसका नाम "पारले-जी" कर दिया गया। पहले "G" का अर्थ ग्लूकोज़ होता था पर समय बदलने के साथ अब कंपनी ने बिस्किट के कवर पर "जी" का मतलब जीनियस कर दिया।
पहले इसके कवर पर गाय और ग्वालन की तस्वीर रहती थी जिसकी जगह एक बच्ची ने ले ली। लेकिन सच तो यह है कि इस बच्ची का फोटो किसी वास्तविक बच्ची का न होकर पारले फैक्ट्री के एक कर्मचारी के मित्र मदनलाल दहिया के द्वारा सन् 1960 में एनिमेशन से बनाया गया है।


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